'कॉमन सेंस' भले ही आम शब्द हो परंतु आशुलिपि में यह बहुत ही काम का साबित होता है। अगर आप एक कुशल आशुलिपि बनना चाहते हैं तो आपको अपना कॉमन सेंस डेवलप करना ही होगा। इसके बिना आप एक रोबोट की भांति होते हैं।
क्या होता है कॉमन सेंस ?
हालॉंकि इस शब्द के अनेक अर्थ होते हैं या यूॅं कहें कि यह अनेक स्थान पर अनेकार्थी रूप में प्रयुक्त होता है। आशुलिपि के क्षेत्र में कॉमन सेंस को अगर देखा जाए तो इसका मतलब होता है सार्थक सोच और जागरूकता। यह आशुलिपिक के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इसके अभाव में लिप्यंतरण करना संभव नहीं होता।
कॉमन सेंस का उपयोग
आशुलिपि एक संकेत लिपि है जिसमें हिन्दी या अंग्रेजी के वर्ण को एक संकेत प्रदान किया जाता है। चूॅंकि आशुलिपि में एक ही रेखा से एक ही आकृति के एक से अधिक वर्ण बनते हैं या यूॅं कहें कि एक ही रेखा से एक से अधिक अर्थ निकलते हैं, ऐसी स्थिति में अनुच्छेद के अनुरूप रेखा विशेष का सार्थक अर्थ निकालना बहुत ही अहम होता है। यहीं पर आपका कॉमन सेंस काम आता है कि आप उस रेखा से बनने वाले विभिन्न शब्द में से किसका चयन करते हैं।
उदाहरण के तौर पर हम यदि श्रुतलेख में 'श रेखा' लिखकर 'प' से काट देते हैं, और आपकी प्रणाली में 'श' से शिक्षा, देश, शिक्षण, देशी, अशिक्षा बनता है और 'प' से पद्धति, पार्टी, परिषद् आदि बनता है तो लिप्यंतरण के समय उसका अर्थ क्या होगा यह हमारे कॉमन सेंस पर निर्भर करता है। जिनमें कॉमन सेंस ठीक से कार्य नहीं करेगा वह उसका कोई भी रूप लिख सकते हैं या फिर घंटे तक सोचेंगे कि यहॉं पर क्या फिट हो सकता है। लेकिन अगर आपका कॉमन सेंस ठीक—ठाक है तो आप यह मनन करेंगे कि अनुच्छेद में किसका जिक्र किया गया है। यदि अनुच्छेद शिक्षा के बारे में है तो आपका कॉमन सेंस स्वत: ही वहॉं पर शिक्षा पद्धति होने का सुझाव देगा।
कैसे विकसित करें कॉमन सेंस ?
कॉमन सेंस, जैसा कि नाम से स्पष्ट है सामान्य बुद्धिमत्ता, यह तभी विकसित होती है जब हम बुद्धिमान होते हैं और हम तभी बुद्धिमान होते हैं जब हम पढ़ते हैं। यानि कॉमन सेंस डेवलप करने के लिए हमें पढ़ना पड़ेगा।
अब आप सोच रहे होंगे कि क्या पढ़ना होगा। कुछ भी पढ़ना, चाहे वह लेख हो, कहानी हो, श्रुतलेख हो या अन्य कोई टिप्पणी बगैरह, सब कुछ पढ़ना आपके लिए उपयोगी होगा लेकिन यहॉं पर ध्यान देने की बात यह है कि जो लेख, कहानी आप पढ़ें वह व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध हों। क्योंकि अगर आप गलत वर्तनी वाले शब्द युक्त कहानी या लेख पढ़ेंगे तो आपकी हिन्दी व्याकरण का स्तर गिर जाएगा।
इंटरनेट जब से व्यापक और सहज हुआ है तब से हजारों, लाखों की संख्या में ब्लॉग, वेबसाइट जन्मे हैं जिनमें से अधिकांश में व्याकरण का पूरी तरह कचरा किया जाता है। अत: ऐसे वेबसाइट और ब्लॉग से सावधान रहें।
हालॉंकि इस शब्द के अनेक अर्थ होते हैं या यूॅं कहें कि यह अनेक स्थान पर अनेकार्थी रूप में प्रयुक्त होता है। आशुलिपि के क्षेत्र में कॉमन सेंस को अगर देखा जाए तो इसका मतलब होता है सार्थक सोच और जागरूकता। यह आशुलिपिक के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इसके अभाव में लिप्यंतरण करना संभव नहीं होता।
कॉमन सेंस का उपयोग
आशुलिपि एक संकेत लिपि है जिसमें हिन्दी या अंग्रेजी के वर्ण को एक संकेत प्रदान किया जाता है। चूॅंकि आशुलिपि में एक ही रेखा से एक ही आकृति के एक से अधिक वर्ण बनते हैं या यूॅं कहें कि एक ही रेखा से एक से अधिक अर्थ निकलते हैं, ऐसी स्थिति में अनुच्छेद के अनुरूप रेखा विशेष का सार्थक अर्थ निकालना बहुत ही अहम होता है। यहीं पर आपका कॉमन सेंस काम आता है कि आप उस रेखा से बनने वाले विभिन्न शब्द में से किसका चयन करते हैं।
उदाहरण के तौर पर हम यदि श्रुतलेख में 'श रेखा' लिखकर 'प' से काट देते हैं, और आपकी प्रणाली में 'श' से शिक्षा, देश, शिक्षण, देशी, अशिक्षा बनता है और 'प' से पद्धति, पार्टी, परिषद् आदि बनता है तो लिप्यंतरण के समय उसका अर्थ क्या होगा यह हमारे कॉमन सेंस पर निर्भर करता है। जिनमें कॉमन सेंस ठीक से कार्य नहीं करेगा वह उसका कोई भी रूप लिख सकते हैं या फिर घंटे तक सोचेंगे कि यहॉं पर क्या फिट हो सकता है। लेकिन अगर आपका कॉमन सेंस ठीक—ठाक है तो आप यह मनन करेंगे कि अनुच्छेद में किसका जिक्र किया गया है। यदि अनुच्छेद शिक्षा के बारे में है तो आपका कॉमन सेंस स्वत: ही वहॉं पर शिक्षा पद्धति होने का सुझाव देगा।
कैसे विकसित करें कॉमन सेंस ?
कॉमन सेंस, जैसा कि नाम से स्पष्ट है सामान्य बुद्धिमत्ता, यह तभी विकसित होती है जब हम बुद्धिमान होते हैं और हम तभी बुद्धिमान होते हैं जब हम पढ़ते हैं। यानि कॉमन सेंस डेवलप करने के लिए हमें पढ़ना पड़ेगा।
अब आप सोच रहे होंगे कि क्या पढ़ना होगा। कुछ भी पढ़ना, चाहे वह लेख हो, कहानी हो, श्रुतलेख हो या अन्य कोई टिप्पणी बगैरह, सब कुछ पढ़ना आपके लिए उपयोगी होगा लेकिन यहॉं पर ध्यान देने की बात यह है कि जो लेख, कहानी आप पढ़ें वह व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध हों। क्योंकि अगर आप गलत वर्तनी वाले शब्द युक्त कहानी या लेख पढ़ेंगे तो आपकी हिन्दी व्याकरण का स्तर गिर जाएगा।
इंटरनेट जब से व्यापक और सहज हुआ है तब से हजारों, लाखों की संख्या में ब्लॉग, वेबसाइट जन्मे हैं जिनमें से अधिकांश में व्याकरण का पूरी तरह कचरा किया जाता है। अत: ऐसे वेबसाइट और ब्लॉग से सावधान रहें।

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